रिलेशनशिप एडवाइज- बॉयफ्रेंड सुनता नहीं, जज करता है:हर बात में मेरी गलती निकालता है, क्या ये रेड फ्लैग है, मुझे क्या करना चाहिए
By : Devadmin -
सवाल- मैं दिल्ली में रहती हूं, 2 साल से रिलेशनशिप में हूं। मैं जब भी अपने बॉयफ्रेंड से अपनी प्रॉब्लम्स शेयर करती हूं, वो मेरी बात सुनने के बजाय तुरंत गलती निकालने लगता है। अगर मेरे किसी दोस्त ने कुछ कह दिया, पेरेंट्स ने कुछ कह दिया, ऑफिस में कुछ हो गया। मैं उसे बताती हूं तो कहता है कि, “तुम्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था, मैंने पहले ही मना किया था।” या फिर यह कि “तुम गलत सोच रही हो, ये तो कोई प्रॉब्लम ही नहीं है।” इससे मुझे ऐसा महसूस होता है कि हर बार गलती मेरी ही है। जबकि मैं चाहती हूं कि वो मुझे जज न करे, सिर्फ सुने और समझे। इस वजह से मैं बार-बार फ्रस्ट्रेटेड और हर्ट फील करती हूं। क्या यह रेड फ्लैग है? ऐसी कंडीशन में मुझे क्या करना चाहिए? एक्सपर्ट: डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा जवाब- सबसे पहले तो आपका शुक्रिया कि आपने अपनी भावनाओं को इतने स्पष्ट तरीके से लिखा है। आप अपने पार्टनर से जो उम्मीद कर रही हैं, वह हर किसी की इमोशनल जरूरत है। हर शख्स ये उम्मीद करता है कि उसे बिना जज किए सुना और समझा जाए। आपकी फीलिंग्स जायज हैं। अगर पार्टनर जजमेंटल हो तो ठहरकर सोचना जरूरी है। चलिए, पहले आपके पार्टनर के बिहेवियर पैटर्न को ठीक से समझते हैं। फिर देखते हैं कि क्या ये बिहेवियर रेड फ्लैग है और आपको इस स्थिति में क्या करना चाहिए। सबसे पहले बिहेवियर पैटर्न को समझते हैं आपने बताया कि जब बॉयफ्रेंड से कोई बात शेयर करती हैं तो वो आपकी पूरी बात सुनने से पहले ही जजमेंट देने लगता है। इससे आपको महसूस होता है कि आपकी बात मायने नहीं रखती, आपकी फीलिंग्स को कमतर करके आंका जा रहा है। आपने बताया कि धीरे-धीरे आपके अंदर यह बात घर करने लगी है कि शायद आप में ही कुछ कमी है। ये इमोशनल डैमेज के संकेत हो सकते हैं यानी आप अंदर से टूट रही हैं। अगर पार्टनर जजमेंटल हो तो इसके क्या साइकोलॉजिकल प्रभाव होते हैं, ग्राफिक में देखिए- पार्टनर के इस बिहेवियर के पीछे क्या कारण हो सकता है? अगर पार्टनर बार-बार जजमेंट दे रहा है तो हो सकता है कि उसकी भावनात्मक समझ कमजोर हो। कुछ लोग हमेशा प्रॉब्लम-सॉल्विंग मोड में रहते हैं। कुछ लोग सोचते हैं किसी प्रॉब्लम में लंबे समय तक अटके रहने से अच्छा है कि खुद की गलती मानो और आगे बढ़ो। कुछ लोगों को इमोशनल लिसनिंग (भावनाओं की समझ) की समझ नहीं होती या उन्हें बचपन से यही सिखाया गया होता है कि इमोशन दिखाना कमजोरी है। इसके बावजूद अगर किसी का व्यवहार आपको बार-बार तकलीफ दे। आपकी फीलिंग्स को तवज्जो न दे, आपको कुछ भी बोलने से पहले सोचना पड़े तो यह पैटर्न हेल्दी नहीं कहा जा सकता है। अगर किसी के नेक इरादों के कारण भी दर्द महसूस हो रहा है, तब भी वह दर्द उतना ही वैलिड है। क्या यह रेड फ्लैग है? अगर किसी के व्यवहार से आपकी इमोशनल हेल्थ प्रभावित हो रही है। रिश्ते में असंतुलन पैदा हो रहा है या दबाव महसूस हो रहा है तो ये रेड प्लैग का संकेत हो सकता है। ग्राफिक में रिलेशनशिप के 6 रेड फ्लैग्स देखिए- इन रेड फ्लैग्स को विस्तार से समझिए- इमोशंस को नकारा जा रहा है- इसका मतलब है कि आपकी भावनाओं, दुख या परेशानियों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। हर बार दोषी ठहराया जा रहा है- अगर हर सिचुएशन में किसी एक ही शख्स की गलती निकाली जाए, उसकी हर प्रतिक्रिया पर सवाल उठे तो यह एक अनहेल्दी बिहेवियर है। हमेशा बात थोपी जा रही है- अगर किसी शख्स पर बार-बार बात थोपी जाए तो उसकी अपनी निर्णय लेने की क्षमता कमजोर हो जाती है। हर बात पर जजमेंट दिया जा रहा है- इसका मतलब है कि आपकी हर बात, हर फैसले या व्यवहार को सही-गलत के पैमाने पर परखा जा रहा है। इससे व्यक्ति को खुलकर अपनी बात रखने में असहजता महसूस होने लगती है। बोलने का मौका नहीं मिल रहा है- अगर किसी बातचीत में आपको अपनी बात रखने, सफाई देने या राय व्यक्त करने का अवसर ही न मिले तो रिश्ते में असंतुलन पैदा हो सकता है। मैनिपुलेट किया जा रहा है- इसका मतलब है कि आपकी भावनाओं, कमजोरियों या भरोसे का इस्तेमाल करके अपने मुताबिक निर्णय लेने को कहा जा रहा है। आप अपने पार्टनर से क्या चाहती हैं? यह सवाल खुद से पूछना बहुत जरूरी है। आपने सवाल में लिखा है कि आप यह बिल्कुल नहीं चाहती हैं कि आपका पार्टनर हर बार आपके लिए लड़े या हर बात में आपको ही सही ठहराए। आप सिर्फ यह चाह रही हैं कि वो आपको बीच में बिना टोके सिर्फ सुने। आपकी फीलिंग्स को समझने की कोशिश करे। अगर ऐसा नहीं हो रहा है तो आपको अपनी फीलिंग्स साफ-साफ शब्दों में बतानी होगी। आप क्या कर सकती हैं? सबसे पहले शांत माहौल में पार्टनर से बात करें। इस दौरान किसी भी तरह के आरोप लगाने से बचें, सिर्फ अपनी फीलिंग्स शेयर करें। अपनी बात एकदम साफ-साफ शब्दों में कहें। अक्सर मुश्किल ये होती है कि हम एक्सपेक्ट कर रहे होते हैं कि लोग हमारी बात समझ लेंगे, लेकिन कोई माइंड रीडर नहीं होता है। हमें अपनी बात कहनी पड़ती है। अपनी फीलिंग्स और जरूरतें स्पष्ट शब्दों में बतानी पड़ती हैं। कैसे बात करनी चाहिए, ग्राफिक में देखिए- खुद का ख्याल जरूर रखें अगर आपको इस कंडीशन में तनाव हो रहा है तो इस सबके बीच खुद का ख्याल रखना मत भूलिए। काम या पढ़ाई से ब्रेक लें, नियमित वॉक पर जाएं, अपनी पसंद के काम करें। अगर हर्ट फील कर रही हैं तो इसके पीछे की वजहों को एक डायरी में नोट करें, लेकिन खुद को दोष न दें। अपने दोस्तों से मिलें-जुलें। अगर जरूरत महसूस हो तो काउंसलर की मदद लें। पार्टनर नहीं समझता है तो क्या करें? अगर पार्टनर आपके बार-बार समझाने, स्पष्ट तरीके से बात कहने के बावजूद नहीं समझ रहा है तो खुद से ये सवाल पूछना जरूरी है- “क्या इस रिश्ते में मैं सुरक्षित महसूस करती हूं, क्या मेरी भावनाओं और जरूरतों को अहमियत मिल रही है?” किसी भी रिश्ते में प्यार का मतलब सिर्फ साथ में होना भर नहीं है। प्यार का मतलब होता है- जहां आप खुद का अस्तित्व महसूस कर सकें, किसी डर या दबाव के बिना अपनी बात कह सकें। ग्राफिक में देखिए, हेल्दी रिश्ते की क्या निशानियां हैं- हर रिश्ता जिंदगी का अहम हिस्सा होता है, लेकिन वह पूरी जिंदगी नहीं होता है। आप कोई भी निर्णय लें तो उसमें खुद को प्राथमिकता दें। आप समझदार इंसान हैं। खुद के लिए बेहतर फैसला लेने में सक्षम हैं। ………………
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Source: Health